दिले शायरी-76
---चारों तरफ़ "मैं" और "मेरी पहचान" की नुमाईश है,
मैं को हटाकर हम करने की तनिक सी न गुंजाइश है!!
---तू मुझमें है मैं तुझमें हूँ ये फन्डा समझ नहीं आता,
जब लड़ते हैं भाई-भाई, तब तू तो नज़र नहीं आता!!
---प्यार का सिलसिला गुरु बॉटते आये हैं हमेशा,
और हमने आपसी प्यार में नमक घोल के रखा है!!
---लोग कहते हैं कि भगवान को भला किसने देखा है,
मैंने तो अपने सतगुरु में ही भगवान को हँसते हुए देखा है!!
---जो रात ख्व़ाबों में तुम्हारे साथ गुज़र जाती है,
वो पूरा दिन भी मेरा ख़ुशनुमा कर जाती है!!
---तुम साथ रहते हो मेरे इसीलिए तो खड़ा हूँ मैं,
तुम्हारी ताकत ने मुझे कभी गिरने ही न दिया!!
@शशिसंजय
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें