अमृतवाणी-190
अध्यात्म एक नगद धर्म
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गायत्री मंत्र हमारे साथ- साथ-
ॐ भूर्भुवः स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।
इस शिविर में में उस अध्यात्म को आपको सिखाने वाला हूँ जो मुझे मेरे गुरु ने सिखाया है और उसका परिणाम नगद धर्म है। इससे आपको क्या मिलेगा, इससे आपको भीतर से एक ऐसी चीज मिलेगी, जिसे संतोष कहते हैं। संतोष किसे कहते हैं ?? बेटे, संतोष उसे कहते हैं, जिसके कारण आदमी मस्ती में झूमता रहता है, खुशी से झूमता रहता है। आदमी की परेशानियाँ दूर हो जाती हैं। न आदमी को ट्रैक्युलाइजर की गोलियाँ खानी पड़ती हैं, न ड्रिंक करना पड़ता है और न सिनेमा जाना पड़ता है। आदमी अपनी जिंदगी शांति से, चैन से जी लेता है। ऐसी जाते की जिंदगी ,, जिसमें बहुत गहरी नींद आती है।
अध्यात्म एक नगद धर्म १
आज इसके बिना आदमी हैरान रहते हैं और कहते है कि नींद ही नहीं आती। नींद किसको आएगी? हरेक आदमी को आएगी, जिसका अंतर्द्वद्व बंद हो जाएगा। जिनके अंदर के साँड़ लड़ना बंद कर देंगे। जो एक रास्ते पर चलेंगे।
क्रांतिकारी अध्यात्म की ऋद्धियाँ- सिद्धियाँ
मित्रो ! अगर आपको यह पसंद हो कि आपको संतोष हो और संतोष की वजह से शांति मिले, तो आपको इस अध्यात्म को अपनाना होगा। इसमें फसल भीतर से उगना शुरू कर देती है, जिसको आप अतींद्रिय क्षमता कहते हैं। अतींद्रिय क्षमता क्या होती हैं ?? दूरदर्शन की क्षमता- दूर देखने की क्षमता, दूर श्वण की क्षमता। हमारे अंदर टेलीविजन लगे हुए हैं, वायरलैस लगे हुए हैं। इतने सारे वैज्ञानिक उपकरण लगे हुए हैं, जो साधारण आदमी को नहीं मिल सकते लेकिन आपको मिल सकते हैं: शर्त केवल यह है कि आपके भीतर जो कोहराम मचा रहता हैं उसे आप बंद कर दें।
साथियों ! जो अध्यात्म हम आपको सिखाएँगे, उसमें यह कोहराम बंद हो जाएगा। जब आपके अंदर का कोहराम खत्म हो जाएगा, तब हर जगह आपको जिन्दगी का जायका, जिन्दगी का मजा मिलेग�
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