सतगुरु-383

सतगुरु तेरे दर पर आना
सबसे अच्छा लगता है
हर पल तेरी शरण में रहना
बहुत सुहाना लगता है
ना बाहर में ना अन्दर में
कहीं भी मन ना लागे है
तेरे दर की ख़ुशबू मुझको
नशे में हर दम राखे है
मन की बगिया खिल जाती है
तेरे दर पर शीश नवाने से
बन्द रास्ते खुल जाते हैं
शरण में तेरी आने से
जल्दी-जल्दी बुलाया करो तुम
बस अपना प्यार लुटाने को
तड़प रहा है कब से बन्दा
गोदी में सर रखने को
प्यार तुम्हारा पाने को
पास तेरे अब आने को !!
               @शशिसंजय

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