जुड़ा हूँ -385
जुड़ा हूँ जबसे तुम्हारे दिल से
बेतार के तार जुड़ने लगे हैं
तुम्हारी महक के बारीक कतरे
अब तो हवा में भी उड़ने लगे हैं
जहाँ भी जाऊँ सब ख़ुश होके मिलते
मेरे अक्स में सबको तुम ही जो दिखते
"मैं" अब कहीं का नहीं रह गया हूँ
तुम्हीं में तो सारा घुल-मिल गया हूँ
तुम्हीं मेरे "आका" तुम्हीं तो ख़ुदा हो
भगवान मेरे तुम ना मुझसे जुदा हो
खोखा चढ़ा है तुम्हारा जो मुझ पर
मचल सा रहा हूँ मैं भीतर ही भीतर
खोखे के भीतर का मलबा हटा दो
सब कुछ मुझे फ़िर नया सा बना दो !!
@शशिसंजय
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें