दौड़ चला-384
दौड़ चला जब तेरे द्वारे
मन को बड़ा सुकून मिला
चौखट तेरी चूम के मुझको
अच्छा सा एहसास मिला
सोते ही मैं रहा यूँ हर-पल
मॉ की गोद में सोया था
देख पिता के चेहरे को मैं
फूट-फूटकर रोया था
तुमसे बिछड़ना दर्द भरा है
इसीलिए घबराता हूँ
प्यार तुम्हारा पाने को मैं
दर पर दौड़ा आता हूँ
गुरुवर मेरे तुमसे झिड़की
खाते ही डर जाता हूँ
गुरुमाता का प्यार मैं पाकर
फ़िर से शेर बना जाता हूँ
दोनों का हाथ रहे सिर पर
बस यही कामना है मेरी
छूट ना पाऊँ कभी भी तुमसे
बस..इतनी सी ज़िद है मेरी !!
@शशिसंजय
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