दिले शायरी 78

---ख़ुशनसीबी है मेरी कि,
      तुम्हारे साये में जीता हूँ,
      तुम्हारे सिवा और कोई
      सहारा नहीं दुनिया में!!

---दिल-दिमाग औ तन से,
      कुछ काम आ सकूँ मैं,
      इतनी सी बस गुज़ारिश,
      तुम पूरी करना सदगुरू!!

---बुदबुदाते हैं हौंठ कुछ कहने को मग़र,
      कुछ कह नहीं पाता जब,
      प्यार के साथ खौफज़दा हो जाता हूँ!!

---हौसलाफजाई से तेरी,
      बढ़ता गया हूँ मैं,
      तूने ही मुझे अब तक,
      कहॉ-कहॉ पहुँचाया है!!

---तलब उठती है बार-बार,
      क़दमों को चूम लेने की,
      बदकिस्मती कहूँ या कुछ और,
      कि तुम रूबरू नहीं हो आज!!
                             @शशिसंजय

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