अँधेरी रात-354

अँधेरी रात में
दीपकों का उजियारा
कुछ इस तरह जगमगाता है
जैसे सजी-सँवरी
दुल्हन के कमरे में
अचानक से दूल्हा
घुसा चला आता है
हर तरफ़ रंग-बिरंगी रोशनियॉ
अपनी मौजूदगी का एहसास
कुछ इस तरह कराती हैं
जैसे जुगनुओं की जगमगाहट से
हर घर के छत की मुंडेरें
कुछ अच्छे से नहाती हैं
जलती हुई बाती अपनी इस व्यथा को
कुछ इस तरह बताती हैं !!
                            💔💔🖤💔💔

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