सलाखों के अन्दर गायत्री साधना-32

इस तरह नवरात्रि पर्व के दिनों में हम सभी पूरे उत्साह में रहते हुए साधना करते और कराते थे। रोज़ उन सभी का उत्साह देखते ही बनता था। दिन भर के कार्यक्रम के बाद
जैसे ही नादयोग की साधना का समय आया, सब लोग एक जगह इकट्ठे होकर बैठ गए और एक बन्दी भाई ने नादयोग का कैसेट (उस समय सी.डी. नहीं हुआ करती थीं) लगा दिया, संगीत के बीच में ही अचानक से बहुत तीव्र सुगंध आने लगी।हम सभी की ऑखें बन्द थीं, संगीत बन्द हो जाने के बाद भी काफ़ी समय तक सभी लोग ऑखें बन्द किये बैठे थे, ऐसा महसूस हो रहा था कि हमारे बीच में गुरुसत्ता मौज़ूद हैं और हम सभी का रोम-रोम उस सुगंध से भर गया है, दूसरी बात जो विशेष थी कि ऑखें बन्द किये लगभग सभी लोगों की ऑखों से अश्रु धारा बह रही थी।मैंने कहीं पढ़ा था कि दिव्य शक्तियॉ जब भी उपस्थित होती हैं उस समय कुछ विशेष अनुभूतियॉ हुआ करती हैं जैसे ख़ुशबू का
महसूस होना, बिना किसी बात के रोना आना (जीवात्मा का परमात्मा से मिलन) ऑखें बन्द हो जाना, लगातार कई घन्टों तक बिना किसी अवरोध के आनन्द में बैठे रहना,इस तरह और भी बहुत सारे संकेत याद आने लगे, लगभग एक  घन्टा ध्यान मग्न बैठे हुए बीत चुका था कि जैसे ही ये सब बातें याद आने लगी, तो मैंने ऑखें खोलीं।देखा तो अधिकतर बच्चे ऑखें बन्द किये बैठे हैं और अविरल अश्रु धारा बह रही है। मैंने गायत्री मन्त्र बोलकर सामान्य अवस्था में आने को कहा, कुछ देर बाद उन सभी ने ऑखें खोल दीं।
जब पूछा कि रो क्यों रहे थे और आज तो बीस मिनट की जगह एक घन्टे से ज्यादा ध्यान में बैठे हो क्या हुआ  ?
इतना कहते ही उन लोगों ने बताया कि हमें बहुत अच्छी ख़ुशबू आ रही थी और जब आपने हमारे सिर पर हाथ रखा तो और अच्छा मन लग रहा था ऑखें खोलने के लिए मन ही नहीं हो रहा था।
मैंने फिर पूछा कि रो क्यों रहे थे-तब बोले अपने आप ही रोना आ रहा था, बहुत ही अपराध बोध हो रहा था कि जीवन में कुछ अच्छा नहीं कर पाये और यहाँ तक (कारागार) पहुँच गये।
जब मैंने उन्हें बताया कि मैं तो अपनी जगह से हिली तक नहीं हूँ और ना ही मैंने तुम लोगों के सिर पर हाथ ही रखा था, वरन् ये सब हम लोगों ( जितने बहन भाई हमारे साथ थे)को भी महसूस हुआ है। इतना सुनते ही वे लोग चौंक उठे, कि गुरुदेव-माताजी इस तरह आकर सान्त्वना देकर गये हैं, इसका मतलब है कि ज़रूर हमारा अच्छा ही होगा।
                                     क्रमशः!!
                              'गुरुकॄपा केवलम्'
                         "गुरुवर शरणम् गच्छामि"
                                    👣🙏

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

याद आपकी-428

दृष्टा-425

कर्म -426