सलाखों के अन्दर गायत्री साधना-33
नवरात्रि पर्व की पूर्णाहुति के बाद हमें फॉसी के बाड़े में जाने की तैयारी करनी थी जहाँ पर खूँखार बन्दी, पाकिस्तान व अन्य जगहों के विशेष बन्दी रखे जाते हैं ,वह बाड़ा हम सभी के लिए नवरात्रि के आखिरी दिन खोला जाता था ताकि हम उन्हें अपनी बात (आध्यात्मिक संदेश) कह सकें प्रसाद साहित्य दे सकें। पूजा का थाल व अन्य सामान लेकर हम जब अन्दर पहुँचे तो एक-एक बैरक में बाहर से ही प्रसाद अखबार में डालकर उनके ग्रिल के गेट से उनके कटोरे में दे दिया तथा अन्दर हाथ डालकर उनके माथे पर तिलक भी लगा दिया। अब बारी थी उनसे बात करने की, एक बैरक में एक ही बन्दी रहता है। हम जिस बैरक में प्रसाद दे रहे थे उस भाई से जब जप व गुरुदेव के साहित्य के बारे में बात की, तो उसने बताया कि 30 माला रोज़ गायत्री मंत्र की करता हूँ और गुरुदेव के 2 वाsगंमय पढ़ चुका हूँ तीसरा "जीवन देवता की साधना आराधना" वाsगंमय पढ़ रहा हूँ। सुनकर बहुत ही अच्छा लगा। कहने लगा यहाँ से तो फॉसी की सजा फाइनल हो चुकी है अब सुप्रीम कोर्ट में फाइल लगाई है, निर्णय आना बाकी है। पर एक बात है कि पहले मैं दिन रात रोता ही रहता था अब अन्दर से एक अच्छी सी फ़ील आती है कि जो भी होगा अच्छा ही होगा। आगे गुरुजी की मर्ज़ी पर निर्भर है। इन अकेली कोठरियों में रहना आसान नहीं होता दीदी----? टट्टी-पेशाब के लिए भी बाहर नहीं निकल सकते, बाहर की कोई भी ख़बर नहीं मिलती, किसी से मिलने का तो सवाल ही नहीं ? अपराध तो हो जाता है किन्तु भविष्य के बारे में मन नहीं सोच पाता कि आगे क्या होगा ? अब लगता है कि गुस्से में कभी कुछ अच्छा नहीं होता, बुरा जरूर हो जाता है। अब तो मुझे कुछ भी सोचने का समय ही नहीं मिलता। दिन भर का काम गुरुजी ने दे दिया है। सब कुछ सुनते हुए मन बड़ा भारी हुये जा रहा था लेकिन यह भी लग रहा था कि अचानक से यह बच्चा कितना समझदार हो गया है, जब पिछले नवरात्रि में हमने इसको प्रसाद लेने व तिलक लगवाकर जप माला व साहित्य लेने के लिये बोला तो बड़ा ही नीरस दिखाई दे रहा था और बहुत मुश्किल से समझाने के बाद वह राजी हुआ था, आज वह हमें समझा रहा है, ख़ुशी भी हो रही थी और दुख भी हो रहा था, बड़ी अजीब हालत थी हम सभी की। लेकिन इतना जरूर लग रहा था कि गुरुकॄपा ही इसे बचायेगी।
क्रमशः!!
'गुरुकॄपा केवलम्'
"गुरुवर शरणम् गच्छामि"
👣🙏
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