तस्वीर(आध्यात्मिक)-31
देखकर तुम्हारी तस्वीर को
कुछ गुनगुनाने लग जाती हूँ मैं
कुछ यूँ एहसास होने लगता है
कि सुन रहे हो तुम मुझे
सचमुच ही सुनते हो तुम
क्यूँ कि...
रहते हो इर्द-गिर्द
इर्द-गिर्द ही क्यों....?
अन्तर्तम में बैठकर
देते हो प्रेरणा
कुछ सुनने और सुनाने की
आती हैं यादें
बैठकर चरणों में
गीत कुछ सुनाने की
शायद.....
इसीलिये गुनगुनाती हूँ मैं
मेरे प्यारे दाता
👣🙏🏻
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