ख़ुशनुमा(आध्यात्मिक)-29
ख़ुशनुमा वो पल
जो तिरे साथ गुज़रे हैं
नहीं भूल सकता
तिरा मुस्कुराते हुये
दिलासा देना
मैं हूँ न.....
क्यों घबराते हो
सब ठीक हो जायेगा
कभी-कभी...
बहुत याद आता है
वो नूर....
जो छाया था चारों तरफ़ तिरे
जिसके घेरे में बैठते ही
समाधान हो जाता था
मन में चल रही हर एक
ऊहा-पोह का...
याद आते हो तुम बहुत ही
मेरे दाता-मेरे प्रीतम
👣🙏🏻
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें