अनकही(सामाजिक)-34

कुछ अनकही सी बातें 

कुछ अनकही सी यादें 

कुछ अनकहे से सपने

कुछ अनकहे से अपने

कुछ अनकहे से रिश्ते

कुछ अनसुने शगूफ़े 

क्या कुछ नहीं है दुनिया में

फिर भी....

बदस्तूर चलना जारी है

रुकता नहीं है कुछ भी

सब कुछ.....

यथावत चलता रहता है

बेशक...

बहुत कुछ...

अनकहा सा..

रह गया हो...

      💔💔🖤💔💔


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