जब से -371

जब से लगन लगी है तुमसे
भूल गया सब दुनियादारी
कैसे बीता जीवन अब तक
समझ न मुझको पूरी आई
तुम संग जोड़े रिश्ते-नाते
तब से कुछ आजाद हुआ हूँ
सौंप दिया सब भार तुम्हें अब
बोझ से अब मैं हल्का हुआ हूँ
हर जीवन का भार अभी तक
तुम ही वहन करते आये हो
सार्थक कर दो इस जीवन को भी
जो अब तक तुम करते आये हो
शरण तुम्हारी पड़ा हूँ भगवन
तुम ही तो मेरे रखवाले हो
पिता हो तुम और सखा भी तुम हो
मेरा सब कुछ तेरे हवाले हो !!
                       @शशिसंजय

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

याद आपकी-428

दृष्टा-425

कर्म -426