रंगों का त्यौहार-374
रंगों का त्यौहार गया पर
छोड़ गया मन की होली
तन और मन को साफ करें अब
भर लें प्यार से हम झोली
काले दिल पर रंग चढ़े ना
काला रंग सबसे न्यारा
रंग सफ़ेद है सबसे अच्छा
शान्ति दूत सबका प्यारा
लाल रंग की ओढ़ चुनरिया
जब मॉ दुर्गा घर-घर आती हैं
दुष्टों का वध करतीं हुई वह
अच्छों को गले से लगातीं हैं
केसरिया उत्साह है भरता
सबके जीवन में अच्छा सा
भीतर बाहर में खुशियाँ रहतीं
मन हो जाता बच्चों जैसा
रंग गुलाबी हो जाता जब
शरमाती कोई प्यारी बाला
सतरंगी वो हो जाती तब
जब रंग खेले कोई मतवाला
सतगुरु के चरणों में खेली थी
मैंने भी होली प्यारी सी
तन और मन सब भीग गया
जब आई थी मेरी बारी
मैं बलि-बलि जाऊँ बलिहारी !!
@शशिसंजय
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