सलाखों के अन्दर गायत्री साधना-51
बालाराम लगातार जप एवं ध्यान नियमित रूप से करने लगा, लेकिन बराबर एक ही बात पूछता-जीजी मैंने तो कभी किसी को थप्पड़ भी नहीं मारा फ़िर मैं यहाँ क्यों आया ? इस सवाल का जवाब केवल गुरुदेव ही दे सकते थे, अतः हम उसके बार-बार पूछने पर यही कहते कि - बेटा कोई पिछले जन्म का अपराध ही हो सकता है, जिसकी वज़ह से तुम यहाँ आये हो। ये भी हो सकता है कि गायत्री माता और गुरुदेव से तुम शायद बाहर नहीं जुड़ पाते इसीलिए तुम्हें उस शक्ति ने यहाँ भेजा हो। जो भी हो जवाब तो गुरुदेव-माताजी ही दे सकते हैं,जब वह ज़्यादा रोता तो हमें भी रोना आने लगता। उसकी तड़प उसकी साधना को और तीव्र करती जा रही थी। जब भी समय मिलता वह मन्दिर के अन्दर बैठकर ही जप-ध्यान करता और भावुकता वश रोता रहता। एक दिन जब हम यज्ञ कराने पहुँचे तो जाते ही उसने जो बताया वह ज्यों का त्यों लिख रहे हैं-उसने हमारे वहॉ पहुँचते ही बताया कि मैं रोजाना की तरह फैक्ट्री के काम से फ्री होने के बाद मन्दिर में मूर्ति के सामने बैठकर ही जप कर रहा था लगातार ऑखों से ऑसू बह रहे थे और बाबा से (गुरुदेव से) पूँछ रहा था कि किस अपराध की सज़ा काट रहा हूँ, कई घन्टे इसी तरह रो-रोकर जप करते बीत गए कि अचानक माताजी (गुरुमाता) की करुणामयी आवाज़ सुनायी पड़ी-अरे बेटा (उसका नाम लेकर) तू रोता है तो गुरुदेव और मैं भी तेरे दुख से रोने लगते हैं। बेटा तूने पिछले जन्म में अपनी भाभी को गुस्से में
मार डाला था, पिछले जन्म में तो तू बच गया लेकिन इस बार उसी कर्म की सज़ा तुझे मिली है, लेकिन तू चिन्ता मत कर, तू गायत्री जप करता रह, हम तेरी सहायता करेंगे और जल्दी ही तुझे बाहर निकालेंगे।
यह सब बताते-बताते वह ख़ुशी से रो रहा था और बार-बार विश्वास के साथ कह रहा था कि आप सच कहते थे कि मैं पिछले जन्म की सज़ा काट रहा हूँ। उसे क्या मालूम कि हमारे पास उसकी बात का कोई जवाब नहीं था हम सिर्फ़ उसको तसल्ली देने के लिए कहते थे क्यों कि अन्दर से उसकी बात में सच्चाई झलकती थी। कहते हैं कि इंसान ही इंसान के दुख आने पर हँसता है, केवल ईश्वर ही उसके दुख को दूर कर सकता है और सचमुच गुरुदेव भगवान ने उसे उसके पिछले जन्म के कर्म याद दिलाकर तथा इस जन्म की साधना बताकर उसके विश्वास को और मजबूत कर दिया था। ऐसा समर्थ सत्ता - समर्थ गुरु ही कर सकते हैं साधारण इंसान के बस की बात नहीं है।
इस तरह गुरुदेव - माताजी ने अपने इस भोले-भाले बच्चे पर दया कर उसे दिशा दिखाई।
क्रमशः!!
"गुरुकॄपा केवलम्"
"गुरुवर शरणम् गच्छामि"
👣🙏
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