दिले शायरी -65
---तुम्हारी चाह ने दुनिया से चाहत भुला रखी है,
ये करम है मुझ पर तेरा, कि तूने अपनी ही चादर उड़ा रखी है!!
---तुम्हारे आने का एहसास, तुम्हारी ख़ुशबू से हो जाता है, महक उठता हूँ मैं भी, बेशक तुम दिखते नहीं हो!!
---सब में तू है सब तेरे हैं, प्यार भी तेरा सब पाते हैं,
तेरे साथ में रहकर हम तो,अपनी तक़दीर पै इठलाते हैं!!
---इश्के मुहब्बत तुझसे की है,और किसी को जानूँ ना,
तू ही रब है मेरा प्यारा, तुझको कभी मैं भूलूँ ना!!
----तेरी चौखट मेरा काबा, तेरा दर मेरा गुरुद्वारा,
तेरा दिल मेरा मन्दिर है,तेरी नजरें चर्च है मेरा!!
----काशी काबा पता नहीं है, तू ही मेरा सब कुछ है,
सारे तीरथ, हज पर जाना,तेरा दर ही सब कुछ है!!
@शशिसंजय
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें