दिले शायरी-68

रहमों-करम पै तेरे ही, चलती है दुनिया
देते हुये तुझको, किसी ने भी ना देखा !!

तेरा दर ही देने वाला, बाकी सब तो लेने वाले हैं
फ़िर भी देने का भ्रम हैं पाले, ये मकड़ी के जाले हैं!!

मैं तो हरदम भटकता आया, फ़िर भी तूने साथ निभाया
कैसे करूँ शुकराना तेरा, बस दिल से तुझको चाहता आया !!

रिश्ते-नाते झूठे-झगड़े, माया-मोह के बन्धन तोड़ के
तूने गोद बिठाकर अपनी, दुनियादारी मुझे सिखा दी!!

ज़ेहन में उतरती हैं वो यादें पुरानी
तेरे पास आते ही रंगत निखरना !!

मैं भूला नहीं हूँ, न भूलुँगा तुमको
मेरा प्यार- चाहत, तुम्हीं मेरे सतगुरु
                          तुम्हीं मेरे दाता!!
                          @शशिसंजय

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