देख पिया को-372
देख पिया को हुई बाबरी
मन में मेरे उठी हिलुरिया
लह-लह-लह लहराये चुनरिया
दिल धक-धक मेरा करे बाबरिया
ऑख के ऑंसू गिरें गाल पर
मन को भीगा करके जायें
होंठ बुदबुदा रहे थे पल-पल
पीड़ा मन की बतलाते जायें
कैसे निष्ठुर हो गये प्रीतम
कोई खबरिया ली ना अब तक
रो-रो कर मैं हुई बाबरी
मिल ना ली मैं तुमसे जब तक
अब आये हो तो जाना मत तुम
मुझको भी राहत देते रहना
बिछुड़ी अपनी इस बॉदी को तुम
अब बिछड़न से दूर ही रखना
नींद जो टूटी ख्वाब था वो तो
तकिया भीग रहा था पूरा
तुम ना दीखे आस-पास भी
बस मनुआ था भीगा-भीगा!!
@शशिसंजय
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