औक़ात-386

औक़ात नहीं थी मेरी
जितना दिया है तूने
तेरा करम है मुझ पर
कितना लिया है मैंने
परवरदिगार मेरे ...
दामन छना (फटा) हुआ था
तेरी रहमतों को मैंने
झोली में डाल रखा था
कैसे बताऊँ आका
तुम देते रहे बराबर
ग़ैरत की इस झोली से
झरता रहा बराबर
औक़ात से ज़ियादा
देते रहे हो तुम भी
मैं ना समझ था कितना
कुछ कद्र भी नहीं की
मुझे माफ़ कर दो दाता
बस हाथ सिर पर रख दो
गुनाहगार हूँ तुम्हारा
बस प्यार मुझमें भर दो!!
                @शशिसंजय

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