सलाखों के अन्दर गायत्री साधना

धीरे-धीरे रविवारीय कार्यक्रम चलता रहा, लगभग 1200 बन्दी भाई थे उस समय कारागार में । अधीक्षक महोदय ने सबको यज्ञ में शामिल रहने के लिए कह रखा था कोई भी बैरकों में नहीं रहना चाहिए । सभी मौजूद रहने लगे, लेकिन सबको अच्छा ही लगे ,ऐसा भी नहीं था किन्तु मजबूरी थी कि अधीक्षक महोदय के आदेश थे ।बच्चे आखिरकार बच्चे ही होते हैं चाहे उम्र कितनी भी क्यों न हो ! उम्र का 'बच्चा मन'से कुछ लेना देना नहीं है । सब लोग यज्ञ में शामिल होने लगे । उन्हीं में से एक 4-5 युवकों का ग्रुप पूरी तरह शैतानी के लिए आता था यज्ञ में जरूर बैठना, लेकिन बीच-बीच में कुछ न कुछ सवाल भी पूछना । हम लोग गुरुदेव माताजी से पहले ही निवेदन करके जाते थे कि आप इन सबमें इतना  अपनापन भर देना ताकि आपका संदेश बराबर इन्हें मिलता रहे । उन युवाओं को देखकर मन इतना दुखी हो जाता था कि रातों को नींद नहीं आती थी ।इतने सुन्दर बच्चे आखिर इनका अपराध क्या है । लेकिन हम कभी पूछते नहीं थे क्यों कि अभी हमें खुशी का माहौल वहॉ बनाना था और विश्वास भी जीतना था ।
एक दिन यज्ञ में अचानक ज़ोर - जोर से कुछ ब॔दी भाई हँसने लगे, मालूम हुआ कि वो शैतान बच्चों का ग्रुप चुपके से यज्ञ का घी पी गये थे तथा थाली में जो प्रसाद रखा था वह खा गये । जब पूछा कि ऐसे क्यों किया, तो जबाब दिया कि यज्ञ में घी फूंकने से तो अच्छा है कि घी पेट में जाये,और प्रसाद आप आरती के बाद देते ? हमने पहले ही खा लिया ? धीरे-धीरे प्यार से उन बच्चों में बदलाव आने लगा ।मालूम हुआ कि वे लोग आजीवन कारावास की सजा में थे,बाद में वे लोग यज्ञ में बैरकों में से सभी को निकाल कर पहले ही यज्ञ के स्थान पर पहुंच जाते । यह सब देखकर हमारा भी उत्साह बढ़ रहा था । हर बार नये- नये सवाल सोच कर आते और हमें देखते ही सवालों की झड़ी लगा देते , जैसे-तैसे जितना समझ आता उतना समझा देते ।लेकिन यह स्थाई इलाज नहीं था । गुरुदेव की कृपा का एहसास समझ आने लगा और वाड्मय सैट 70 किताबों का (गुरुदेव द्वारा लिखित) कारागार की लाइब्रेरी में रखवा दिया ताकि उनकी जिज्ञासा खुद गुरुदेव ही शान्त कर सकें ।वाड्मय सैट हम लोगों के निवेदन पर गायत्री के अनन्य साधक भाई जी ने स्वयं कारागार में जाकर रखवाया ।
                                                क्रमशः---
                                     "गुरुवर शरणम् गच्छामि"
                                                👣🙏

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