दिले शायरी-80
---तन मन और धन
किस पर गुरूर अच्छा है,
जानता हूँ कि तेरी यादों के सिवा,
साथ कुछ भी नहीं जाना है!!
---बेइन्तहा खुशियों से,
भर दी है झोली तुमने,
परवरदिगार सतगुरु,
कैसे शुकराना करूँ!!
---सजदे में सर झुका ही रहे,
ऐसी मेहर रखना सतगुरु,
देखूँ तो केवल तुझे देखूँ,
उतना ही सर मेरा उठे!!
---तेरी ताकत तेरा हौसला,
मुझको हरदम मिलता है,
कैसे भूलूँ तुझको प्यारे,
तू हर सॉस में बसता है!!
---ख़्यालों में डूब जाता हूँ तो,
क़लम थम सी जाती है,
तेरे उपकारों को बयां करना,
मेरे बस की बात नहीं!!
@शशिसंजय
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