मौन-363

मौन की भाषा समझ न आती
फ़िर भी तुम समझाते हो
मेरे सतगुरु - मेरे दाता तुम
कितना साथ निभाते हो
तुमने जिसका हाथ है पकड़ा
अन्तिम समय तक निभाया है
जिसको है दुनिया ने पकड़ा
उसको उतना ही रुलाया है
मौज में रहना मौज में जीना
सब तुमने ही सिखाया है
झोलियॉ खुशियों से भरना
ये सब ही तुम्हारी माया है
गागर इतनी भर दी है तुमने
अब तो रही नहीं कोई चाह भी 
शरणागत रहूँ जन्मों तक तुम्हारी 
बस इतनी तुमसे  है आशा भी  !!
                         👣🙏
                      @शशिसंजय

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