तुमने-370
तुमने बॉहें फैलाकर जब
कलेजे से लगाया अपने
तमाम दुनिया की खुशियाँ
झोली में मेरी
अचानक से भर दीं तुमने
मुझको कुछ समझ न आया
मेरे सतगुरु----
मैंने तो किसी भी पहचान से अलग
केवल तुम्हीं से पहचान मॉगी थी
तुमने तो ज़मीं से उठाकर
अपनी गोदी में बिठाया मुझको
जब किसी बच्चे पर पिता को
बहुत प्यार आया करता है
खुश होकर वो अपने बच्चे को
आकाश में उछाला करता है
बस ऐसा ही दुलार तुम दोनों ने
मुझको भी दिया है हमेशा
ॠण कैसे चुका पायेगी
ये काया मेरी
रहमतों की बरसात
जो बरसती है हरदम
आज भी हरपल मेरे ऊपर
मेरे सतगुरु-मेरे दाता !!
@शशिसंजय
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