तेरी बातों-367

तुझे तेरी बातों का वास्ता देकर
कितना कुछ झिकाया करती थी
सुनकर मुस्कराते हुये ही
हर बात को टाल जाना
यही ख़ूबी थी तेरी जो
हमेशा लुभाती थी मुझे
ये अच्छाईयों का बंडल भी
तेरे पास ही हुआ करता है
वर्ना आम इंसान तो ज़रा सा
कुछ कह देने से भी
भड़क जाया करता है
इतने गुणों का पुलिंदा भी
तुम ख़ुद ही लिये रहते हो
मुझको भी तो अपने क़ाबिल
कुछ थोड़ा सा भी बना दो
मेरे सतगुरु-मेरे दाता !!
                 @शशिसंजय

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