दिले शायरी -57
--दर पै तेरे भीड़ देखकर कितने सवाल उठ आते हैं
मॉगने वाले तेरे सामने क्या-क्या कुछ कह जाते हैं
--निगाहें मिली जब निगाहों से तेरी
निगाहों से तूने कुछ अन्दर जो भेजा
मची दिल में हलचल रगों में कुछ जो दौड़ा
वो मुझको पता ना कि क्या तूने भेजा
--भीतर तुझसे मिलने पर वो अहं कहॉ खो जाता है
बाहर आते ही ना जाने दौड़ कहॉ से आ जाता है
--तेरी इनायतें तेरे करम हावी हैं मुझ पर इस तरह
ढूँढता हूँ वजूद मेरा बस तू ही नज़र आता मुझको
--क्या बताऊँ किस तरह हर रात गुज़रती है मेरी
ख्व़ाबों में ढूँढा करता हूँ तेरे चलने के सारे निसॉ
--तू पास बुलाता है मुझको मैं दूर भागता आया हूँ
संसार को पकड़े बैठा हूँ बस धोखे खाता आया हूँ !!
; @शशिसंजय
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