दिले शायरी -1

--तेरे बदन की धूल हूँ, मेरे लिये ये काफ़ी है,
   धूल तो बहाना है, तुझसे चिपके रहने का!!

--ना कोई ग़िला ना कोई शिकवा,
   दुनिया से कुछ ना किया मैंने,
    मन का हर गुबार भी बस
    तेरे आगे ही निकाला मैंने!!गुस्ताखी माफ़!!

--सज़दा जो किया तेरे दर पर,
   बह निकलती थी ऑसुओं की धारा,
   मुझे आज याद आता है,
    तेरे चरणों का तर-बतर होना!!

--दुनिया से छिपकर तेरे,
   ऑचल में सर छुपा लेना,
   मुझे यूँ ही याद आता है,
    तेरी गोदी में सर रखकर रोना!!         

--तुम्हारे क़रीब आने से,
   मेरा रोम-रोम खिल उठता है,
   ख़ुशबुओं से तर हो जाता है,
    तन और मन मेरा!!

--जितना भी कुछ दिया तूने,
    सँभल न पाया मुझसे
     क्या-क्या ख़तायें मैंने कीं,
      कितना गुनाहगार हूँ मैं!!

--तुझसे मिलने से पहले,
    जिन्दगी बेज़ार थी,
   हाथ तेरा आया जो सर पर,
    ख़ुशनुमा सब हो गया!!
                    "मेरे सतगुरु-मेरे दाता"
                              @शशिसंजय

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