सलाखों के अन्दर गायत्री साधना-38

इसी तरह शुरू की घटनाओं में एक नाम और याद आया,बलराम। बहुत ही चुलबुला और शैतान। हर काम में आगे रहना। शुरू-शुरू में जब ये लोग किन्हीं-किन्ही घटनाओं के कारण कारागार में आ जाते हैं, तो बहुत ही उदास रहते हैं लेकिन समय के साथ ये भविष्य की लड़ाई लड़ते हुए (कोर्ट की कार्रवाई) धीरे-धीरे शांति पूर्ण ढंग से समय व्यतीत करने लगते हैं। ये बच्चा बराबर दौड़ भाग करता रहता, यज्ञ में भी आगे-आगे बैठता। प्रशासन की तरफ़ से कभी कोई फोटोग्राफर आता तो बलराम थोड़ा सतर्कता से बैठता, जो भी हो सबके साथ मज़ाक करना, सब साथियों को छेड़ना और इस कारण कभी-कभी आपस में थोड़ी बहुत तू-तू मैं-मैं भी हो जाया करती थी। कुल मिलाकर कभी ख़ुशी कभी गम का माहौल हो जाया करता था। यज्ञसम्पन्न होने के बाद जब आरती करते तो ख़ूब जोर से जयकारे बुलवाता। मुख्य जयकारा जो देर तक बोले जाता, वह था राजराजेश्वरी माता भगवती की जय ।
भरपूर उत्साह का धनी था वह । बाद में योग की कक्षाओं में भी जाने लगा, बहुत ही मन लगाकर सीखता। एक बार दिल्ली से दूरदर्शन की टीम देखने आई थी कि क्या-क्या गतिविधियां चलती हैं अधीक्षक महोदय ने गायत्री परिवार के बारे में बताया और हम लोगों को बुलाकर उनसे मिलवाया। टीम के मुखिया ने बहुत सारे सवाल पूछे परिवार ,अपराध,आपसी व्यवहार आदि के बारे में । जब तक वे लोग बिना वीडियो चालू किये सवाल पूछते रहे, तब तक तो सब ठीक से जबाब देते रहे, जैसे ही उन्होंने वीडियो चालू किया तो कोई भी सामने आने को तैयार नहीं हुआ।उसका कारण दुश्मनों से व समाज से भयभीत रहना । भीतर रहकर चाहे कितनी ही बहादुरी क्यों न दिखायें, लेकिन कुछ बन्दियों में बराबर आन्तरिक भय भी बना रहता है क्योंकि बाहर से कभी-कभी भीतर भी दुर्घटनाएं घट जाती हैं। बलराम सॉस्कृतिक कार्यक्रमों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया करता था। लेकिन बस एक ही कमी जो मुझे कभी-कभी लगती थी कि वह अन्दर से मजबूत नहीं था। योग को उसने अपने जीवन का अटूट हिस्सा बना लिया था और आज भी वह योग प्रशिक्षक के रूप में कार्य करता है। अब उसकी शादी हो चुकी है और दो प्यारे-प्यारे बच्चों का पिता भी बन चुका है। जब भी कभी उसे याद आ जाती है तो आकर मिल जाता है ।
                                           क्रमशः!!
                                    'गुरुकॄपा केवलम्'
                               "गुरुवर शरणम् गच्छामि"
                                           👣🙏

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