ऑसूँ(व्यक्तिगत)-80

ऑसूँ भी क्या चीज़ हैं ?

चाहे ज़रूरत हो या न हो

लेकिन उन्हें बाहर आना ही है

थोड़ी सी ख़ुशी 

या चुभन होने पर

तुरन्त ही बाहर निकल आना

जी चाहे या न चाहे 

लेकिन उन्हें अपना कार्य करना

सोचती हूँ ?

मेरे दाता

काश तूने ये ऑंखें ही

न बनायी होती

साथ ही न ये ऑसूँ होते

जो अपने मन की व्यथा को

तुरन्त ही बाहर निकलकर 

व्यक्त कर देते हैं

गिरते हुये ऑसुओं की

भला क्या क़ीमत ?

सिर्फ़ इतनी कि

किसी भी दु:ख में गिरा ऑसूँ 

अश्क़ नहीं होता

लेकिन जो...

दूसरों के ग़म को देखकर गिरे

वह ऑसूँ 

एक मोती ही होता है

         💔💔🖤💔💔

              14/12/77




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