अतीत(सामाजिक)-81

अतीत को भूलना

आसान नहीं होता

आख़िर क्यों 

बुरे अतीत के साथ 

चिपके रहने से

ज़िन्दगी दूभर 

लगने लगती है

इसीलिये कुछ लोग

चलते फिरते उठते बैठते

केवल ज़िन्दा लाश की तरह

जीते हैं

मन का चैन मन की शान्ति

कहॉ मिल सकती है

उन्हें पता नहीं 

इसीलिये बार बार की

भटकन से परेशान होकर

ख़्वाबों को टूटते देखकर

वे टूट कर बिखर जाने पर

मजबूर हो जाते हैं

मन का चैन उनसे

कोसों दूर रहता है

इतनी दूर कि

लाखों करोड़ों मील

दृष्टि दौड़ाने पर भी

शान्ति नज़र नहीं आती

जिस तरह मंज़िल की खोज में 

भटके हुये राही को 

दूर दूर तक अपनी

मंज़िल नज़र नहीं आती

         💔💔🖤💔💔

          13/10/77

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

गुरुगीता-3

कुछ यूं है तेर शुकराना-429

दिले शायरी -17