मिट्टी(सामाजिक)-84

मिलना है मिट्टी में

एक दिन सभी को

जानते हैं सभी मगर मानते नहीं 

दौलत-अपने मँजिल-सपने 

काश...?

लेकर जा पाते

अफ़सोस 

छोड़कर ही जाना है

तन भी धन भी महल भी अटरिया भी

कुछ भी तो इजाज़त नहीं 

ले जाने की

मन का सँसार ही

जा सकता है साथ केवल

तभी तो कुछ लोग जो बार-बार

स्वप्न में आकर बतलाते हैं

कि हम हैं मौजूद 

क्यों कि उन के मन के भाव में 

जो रह गया किसी भी तरह

उससे मिलना ज़रूरी

 हो जाता है उनको

यही है सूक्ष्म की शक्ति

     💔💔🖤💔💔

       18/5/18


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