ज़िन्दगी(सामाजिक)-95

ज़िन्दगी एक पगडंडी

चलते जाना है

न जाने कब तक

किस तरह

किस जगह

टूट जाये ये पगडंडी

कहॉ मिल जाये ये ज़िन्दगी 

ज़िन्दगी 

हो जाये गुम

पगडंडी की भॉति

टूट जाये

और रह जायें

याद

सिर्फ़ यादें 

      💔💔🖤💔💔

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

कुछ यूं है तेर शुकराना-429

शुकराना -424

याद आपकी-428