याद आपकी- बात आपकी मुझको खूब सताती है रोकर हंसना- हंसकर रोना कुछ ऐसा हाल बनाती है तुम तो मुझको देखा करते मैं तो देख नहीं पाती किससे भेजूं- कहां मैं भेजूं तेरे लिए जो लिखी है पाती मेरे दाता समझो अब तो हुआ ये क्या है.. दिल का हाल मन को मेरे- "मनहर" मेरे फिर से कर दो मालामाल !!
दृष्टा बनकर देखो पहले बुरे विचार मन में ना लाओ करता है सब करने वाला ईश्वर पर विश्वास जमाओ मैं-मैं अपनी दूर भगाकर देखो उसके खेल निराले अच्छा-बुरा करने वालों के वे ही हैं सबके रखवाले कौन किसी को क्या दे सकता ? ईश्वर ही सब देने वाले उम्मीद किसी से क्यों करना जब कर ही दिया सब उनके हवाले सबको अच्छा सोचा कर तू सब ही अच्छे लगने लगेंगे तेरे दु:खों-तेरे कष्टों को केवल गुरुवर ही दूर करेंगे वे ही सारे कष्ट करेंगे !!
कर्मों का लेखा-जोखा लेने सब आपस में मिलते हैं मात-पिता और बच्चे सारे कर्मों से ही सबको चुनते हैं हम कहते सब मेरा - मेरा कोई यहां ना मेरा होता जिसका क़र्ज़ है चुकना बाकी वो ही केवल साथ है होता रिश्ते - नाते प्यार के धागे पिछले कर्मों से आये हैं किसी से नफ़रत किसी पै गुस्सा ये भी सब कर्मों के साये हैं टूटे बंधन रोते हैं हम यही तो कर्मों की माया है मोह के बंधन तोड़ सकें तो कोई न अपना - पराया है सब उसकी ही माया है !!
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