वर्तमान(व्यक्तिगत)-88
एक भूली भटकी याद आई
बसन्त में फूलों की सुगन्ध आई
और बोली
आओ पीछे लौट चलो
भविष्य के इन्द्र धनुष की
आश्व पर आरूढ़
एक सुन्दर स्वप्न आया
जैसे तोड़कर सीपी में
दूधिया मोती निकल आया
और बोला
आगे बढ़ो
किन्तु वर्तमान मेरा
पहरेदार
कड़ककर बोला
ख़बरदार
तुम कहीं नहीं जाओगे
यहीं सज़ा पाओगे
💔💔🖤💔💔
11/4/75
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