तेरी याद(आध्यात्मिक)-97
तेरा याद का प्याला हरदम
साथ में अपने मैं रखती हूँ
जब-जब याद सताती तेरी
घूँट-घूँट भर पीती हूँ
तुम क्या जानो विरह की गाथा
जन्मों से चलती आई है
तभी तो छोड़के हर पारी में
तुमने मुझको विरह दिलाई है
तब से आज तक तक भटकती प्यारे
इस जीवन भी भटक रही
ज्यूँ-ज्यूँ विरह-वेदना बढ़ती
त्यों-त्यों टीस उठा करती
चौरासी की भटकन प्यारे
अब तो दूर कराओ तुम
एकाकार करो अब गुरुवर
अन्तर्तम में बिठालो तुम
👣🙏🏻
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