निगाहें(सामाजिक)-85

मुझे नहीं मालूम

लोगों की निगाहें किसे ढूँढती हैं

हर पल.....

और.....

पा लेने पर 

टकराकर वापिस आ जाती है

अपनी ही जगह पर

फिर करती हैं तलाश

न जाने.... किसको कहॉ पर

आश्चर्य...?

आख़िर किसलिये

है इतनी कोशिश

जब कि उन्हें मालूम है

अच्छी तरह कि.....

उनकी निगाहें 

किसी एक पर कभी

ठहरती ही नहीं 

फिसलती ही 

चली जाती हैं

हर बार.....,

आगे की ओर...? 

     💔💔🖤💔💔

      21/8/76

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