अतीत(आध्यात्मिक)-94
अतीत के झरोखों से
झॉकते-झॉकते
जब
आज को देखा
वर्तमान
कितना ख़ुशनुमा
फूलों की पँखुड़ियों सा
बिखरा
ख़ुशबू बिखेरता
सुखद बेहद
दोनों हाथों को
फैलाये
ऊपर की ओर
जैसे कह रहा हो
उस परमसत्ता से
क्या कुछ
नहीं दिया तुमने
भरपूर उल्लास के साथ
जीया हूँ मैं
सिर्फ़ और सिर्फ़
तेरी वजह से
मेरे दाता
मेरे परवरदिगार
👣🙏🏻
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