मेरे मन(व्यक्तिगत)-74

मैंने कहा था न !

कि तूफ़ान आयेगा....

ओर तुम बह जाओगे..

मगर तुमने नहीं सुना

मैंने तुमसे कहा था न !

कि वह बेवफ़ा है...

व्यर्थ ही छले जाओगे..,

मगर तुम हँस दिये

मैंने तुमसे कहा था न !

कि ज़माना ख़राब है...

दर दर की ठोकरें खाओगे...

मगर तुम टाल गये

मैंने तुमसे कहा था न !

कि वह अप्राप्य है...

यूँ ही थक जाओगे...

मगर तुम चल दिये..

हॉ,यह बात और है कि

तुमने तूफ़ान को लौटा दिया

कि तुमने उसे ही छल लिया

कि तुम जमाने से जीत गये

कि तुम पार पहुँच गये....

कि तुमने उसे पा लिया...

और मैं...

खड़ा देखता रह गया

            💔💔🖤💔💔

                   12/12/78


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