डायरी(व्यक्तिगत)-77

कुछ पन्नों में 

अतीत की स्मृतियॉ

ख़ुशी के पल

ग़मों की यादों के 

धुँधले से दृश्य

और भी ना जाने

कितनी बातों का इतिहास

दर्ज है....

जब कभी मन होता है

पढ़ने बैठ जाती हूँ

उस बीते हुये कल को

जिसमें सभी कुछ खो सा गया है

मेरी ख़ुशियाँ और मेरे ग़म 

आज का दिन कल

अतीत बन जायेगा

लेकिन सारा विवरण 

याद दिलाती रहेगी

ये डायरी....

बटोरने को अतीत के

कुछ.....

धुँधले से क्षण

          💔💔🖤💔💔

             27/10/77

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