शब्द(सामाजिक)-90

शब्द

जिन्हें ब्रह्म भी कहते हैं

निकलते हैं तीर की तरह

घुसते हैं दिल में 

काश शब्द

सिद्ध हो जाते वरदान में 

न कोई टूटता

न कोई रूठता

सबकी झोलियॉ भर जातीं

ख़ुशी से 

मनोकामनाओं से 

क्यों कि

शब्द ब्रह्म हैं

जो कहा

सच हो जाता

सच तो आज भी होता है

लेकिन

नकारात्मक 

केवल-केवल

नफ़रत के शब्द

वो भी

पीठ पीछे

आख़िर क्यों  ?

       💔💔🖤💔💔

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