तेरी चाहत(आध्यात्मिक)-79

तेरी चाहत तेरा प्यार ही

मुझको चलाये जाता है

ना कुछ क़ाबिल हूँ मैं प्यारे

तू ही बढ़ाये जाता है

ऊँगली के नाखूनों से तुमने

मुझे सहारा दे रखा है

इसी सहारे चलकर ही तुमने

मुझको आते देखा है

जीवन की इस नैया को

तुम कब से सँभाले आये हो

पिछला कुछ भी याद नहीं 

तुम ही बतलाते आये हो

अन्त समय तक थामे रखना

हाथ जो पकड़ा है तुमने

सब कुछ छोड़ तुम्हीं पर निर्भर

अपने को कर रखा हमने

                  👣🙏🏻

                20/5/18

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