जग में(आध्यात्मिक)-96
जग में कोई तेरे जैसा
दाता मेरे दिखता ही नहीं
तू ही मेरी नाव को खेता
तुझ जैसा मेरा कोई नहीं
सारे रस्ते तेरे दर की
याद मुझे आती ही रही
पल-पल सजदे में ये निगाहें
दर तेरे झुकती ही रहीं
ख़ामोश से थे वो सारे मँजर
जिनमें कभी ख़ुशियाँ हैं रहीं
सहमा-सहमा सा हर बन्दा
नज़रें चुराये देखे ही नहीं
ये कैसी ख़ाली सी गठरी जो
अन्तर्तम को भिगोती ही रही
ना जाने तेरी याद के ऑसूँ
मैं कैसे अब तक पीती रही
👣🙏🏻
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें