ज़िन्दगी और मौत(सामाजिक)-82
ज़िन्दगी क्या है
किसके लिये जीते हैं सब
किसलिये जीते हैं
करते हैं सब कुछ
आख़िर किसके लिये
फिर भी शान्ति नहीं
सभी के जीवन में
व्यर्थ की चिन्ताओं से
मुक्त नहीं हो पाते
फ़िज़ूल की परेशानियाँ
घर किये रहती हैं
क्यूँ मन मस्तिष्क को
जकड़े ही रहती हैं
कभी कभी तँग आकर
कुछ मुक्त होना चाहते हैं
चाहते हैं इनके चँगुल से
छूट जायें....
साथ ही दुनिया की
झँझटों से छूट जायें
लेकिन.....
चाहते हुये भी
मुक्त नहीं हो पाते
मौत को आख़िर
गले नहीं लगा पाते
क्या सचमुच
मौत भी
इतनी जटिल होती है
जितनी पार करना
ये ज़िन्दगी होती है
💔💔🖤💔💔
24/9/77
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