रँग-बिरँगी(व्यक्तिगत)-73

रँग-बिरँगी छोटी सी चिड़िया

बगिया में अक्सर आती है

चीं चीं चूँ चूँ की आवाज़ से वो

मन को लुभाया करती है

उसे देखकर मस्त गिलहरी

अपनी आवाज़ सुनाती है

उसे लग रहा प्यार बँट रहा उसका

वो सबको आके उड़ा जाती है

बिल्ली का बच्चा देख के सबको

उछलकूद करने लगता है

मुझको प्यार नहीं करती तुम

पँजों से मुझे बतलाता है

बाहर सारा दृश्य देखकर

शेबू भी भों-भों करता है

उसको लगता मैं ही अकेला

बाक़ी को प्यार मिलता है

देख के इनकी भाव दशायें

मन भी कुछ सोचा करता है

कितना निश्छल प्यार है इनका

जो वाणी से बोल न पाता है

             💔💔🖤💔💔

                   24/5/18

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