दिल में(आध्यात्मिक)-92
दिल में बसते आप हैं
फिर कैसे नाता तोड़ दें
दिल्लगी दिल से लगी
फिर....?
दिल को कैसे तोड़ दें
दिल में रहकर ही तो आप
करते हैं सब काम वो
सोच भी ना पाते हैं हम
कैसे करते आप वो
मौन की भाषा समझते
प्यार की परिभाषा भी
मन की हर तरंग को
कैसे पकड़ते आप भी
रोम के हर छिद्र में
वजूद रखते आप ही
तू और मैं - मैं और तू
सब कुछ हैं बस आप ही
👣🙏🏻
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