दु:ख(सामाजिक)-91

अपना दु:ख अपना ही है

अपना सुख अपना ही है

यह कोई पानी नहीं 

जो बॉटने से बँट जायेगा

यह कोई कपड़ा तो नहीं 

जो काटने से कट जायेगा

जब हम सुख रखते हैं

अपने ख़ज़ाने में 

और

दु:ख बॉटना चाहते हैं

जमाने में 

क्यों ?

  💔💔🖤💔💔

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