ऑखिन देखी(सामाजिक)-40
मेरे ही एक मित्र
जो दिन भर व्यस्त रहते थे
सबका हाल-चाल जानने में
उनकी अपनी एक अलग ही
दुनिया थी फोन की
व्यस्त से व्यस्ततम
अचानक फोन आना बंद
मैसेज आना बंद
काफ़ी दिनों के बाद
पता चला कि
वे अब.......
दुनिया छोड़ चुके हैं
अन्दर तक हिला दिया उनके व्यक्तित्व ने
इतने मिलनसार लेकिन.....
अब परिवार को पूछने वाला कोई नहीं
कहॉ गये वे सभी चाहने वाले.....
एक बार तो पूँछ लेते कि....
अब मैसेज और फोन
नहीं आ रहे.....
दोस्त कहॉ हो.....
कहॉ हो तुम....
कैसे हो....
तुम्हारे परिवार को कुछ....
सहायता....
भाव संवेदनायें...
अपनापन चाहिये क्या......?
💔💔🖤💔💔
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