भावना(सामाजिक)-43

भावना बहती नहीं है

अब कहीं संसार में

देखो कितना आ गया सब

फेर इस बाज़ार में

भाव के सागर

कहीं अब....

सूख से गये हैं सारे

भाव के बिन....

तड़पते हैं संसार के

सब व्यक्ति सारे

अन्तर को जो छू सके

कुछ ऐसा भाव चाहिये 

आपसी विश्वास हो बस

ऐसा भान चाहिये

तम का अँधेरा दूर हो

ऐसा उजाला चाहिये

आपस में प्यार हो

संसार ऐसा चाहिये

        💔💔🖤💔💔

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

याद आपकी-428

दृष्टा-425

कर्म -426