कुछ तो बोलो(आध्यात्मिक)47
कुछ तो बोलो
कुछ तो बताओ
अब फिर....
कब आओगे
आधी-अधूरी ख़्वाहिश मेरी
पूरी कब कर जाओगे
साथ तुम्हारा भाता मुझको
मौसम भी है मिलने का
पल न ठहर कर घन्टों रहना
रोम-रोम खिल जाये मेरा
आना तुम्हारा-ख़ुशबू तुम्हारी
सब कुछ मन को भाती है
शब्द नहीं कुछ भी कहने को
बस संग ही तेरा काफ़ी है
👣🙏🏻
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