लहर(आध्यात्मिक)-52

लहर दीवानी उठ रही

कैसे रोकूँ मैं इसको

ना डुबा दे कश्ती को

कैसे सँभालूँ मैं इसको

कैसे बॉधू शब्दों में 

याद वो तेरी रहमत की

उठ रहा तूफ़ान दिल में

और यादों की बारात भी

शब्दों में कैसे बयॉ करूँ

हर पल कैसे साझा करूँ

पल पल तेरी याद के मोती

माला में कैसे गूँथा करूँ

तेरे साथ का हर क्षण मेरा

क्या भूलूँ क्या याद करूँ

              मेरे दाता....मेरे गुरुवर

                 👣🙏🏻

      

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