बचपन(व्यक्तिगत)-61

बचपन में मुझसे

मेरे ही खिलौने का

एक हाथ टूट गया

उस हाथ को जोड़ने की प्रक्रिया में 

मुझसे पूरा खिलौना ही टूट गया

तब मैं....

बहुत रोया,चिल्लाया

हर चीज़ का मैंने प्रतिकार किया

बचपन के उस अवचेतन मन में 

कहीं एक कोने में 

वह बात अटक गई

अब जब भी कभी

स्मरण आ जाता है,तो

पूछता हूँ अपने मन से

अब कितना रोऊँ, चिल्लाऊँ ?

किसका प्रतिकार करूँ

क्यों कि.....,

अब किसी को भी जोड़ने की प्रक्रिया में 

मैं स्वयं टूट रहा हूँ

                💔💔🖤💔💔 

                     19/1/75

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