गुरुपूर्णिमा(आध्यात्मिक)-41
गुरु की गाथा क्या कहूँ
सब कुछ उनकी देन
रहमत उनकी देखकर
बरसत हैं ये नैन
मन जब भी विचलित हुआ
तुरत संभाला आय
हर पल किसी भी रूप में
करते रहे सहाय
मन और वाणी करम से
बन न सके उन जैस
फिर भी वो अपनाय रहे
हम जैसे थे तैस
👣🙏🏻
गुरु की गाथा क्या कहूँ
सब कुछ उनकी देन
रहमत उनकी देखकर
बरसत हैं ये नैन
मन जब भी विचलित हुआ
तुरत संभाला आय
हर पल किसी भी रूप में
करते रहे सहाय
मन और वाणी करम से
बन न सके उन जैस
फिर भी वो अपनाय रहे
हम जैसे थे तैस
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